game
02/08/2021 By shiv3376 0

एशियायी खेल asian games

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एशियायी खेल asian games

सभी प्रणियों में मानव मस्तिष्क सर्वाधिक विकसित होता है। अपने मस्तिष्क के बल पर इसने समस्त संसार पर आधिपत्य कर लिया है और दिनों-दिन प्रगति के पथ पर अग्रसर है। खेलकूद व्यक्ति के बहुमुखी विकास के लिए आवश्यक है। जार्ज बर्नार्ड शॉ का कहना है हमें खेलना बन्द नहीं करना चाहिए क्योंकि हम बूढ़े इसलिए होते हैं। क्योंकि हम खेलना बन्द कर देते हैं।

शारीरिक अंगों को सक्रिय रखने के लिए

खेल के दौरान शारीरिक अंगों के सक्रिय रहने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है। स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि यदि गीता के मर्म को समझना है तो उसके पूर्व मैदान में जाकर फुटबाल खेलो। महान दार्शनिक प्लेटो ने कहा था कि बालक को दण्ड देने की अपेक्षा अनुशासन का निर्माण खेल द्वारा करना अधिक अच्छा रहता है। क्योंकि स्वाभाविक खेल-कूद से होने वाली हार और जीत जीवन में सफलता और असफलता के समय सन्तुलन बनाये रखने की प्रेरणा देती है।

नियम

बहुत से लोगों का ऐसा विचार है कि खेल-कूद में समय नष्ट होता है। स्वास्थ्य के लिए व्यायाम कर लिया जाये, यही काफी है पर यह ठीक नहीं है। खेल-कूद से मनुष्य का स्वास्थ्य तो बनता ही है, साथ ही उसमें ऐसे गुणों का विकास होता है जिनका जीवन में विशेष महत्व होता है और जो सामान्य व्यायाम से नहीं प्राप्त हो सकता जैसे जीत में अहंकार न करना, हारने में धैर्य न छोड़ना, साहस न छोड़ना, दूसरे से यदि चोट लग जाये तो सहन कर लेना, विशेष ध्येय के लिए नियम पूर्वक कार्य करना आदि ।

शिक्षा एवं रोजगार की दृष्टि से खेल-

शिक्षा एवं रोजगार की दृष्टि से खेल-कूद अत्यधिक महत्वपूर्ण है। “पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे होगे खराब” यह अपरिपक्व विचार है। परिपक्वता हमें बताती है कि स्वस्थ शरीर से ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है। प्राचीन काल में सैनिक युद्ध कला सीखने के साथ-साथ सैन्य प्रशिक्षण के समय कुश्ती, मुक्केबाजी, दौड़ जैसे खेलों का अभ्यास भी किया करते थे, तब शान्ति के समय यदा-कदा खेल • प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता था और सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सैनिकों को राजा पुरस्कृत भी करता था।

game 2

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सामान्य समाज लौकिक उत्सवों पर विभिन्न प्रकार की देशज खेल प्रतियोगिताएं पक की मुख्य हिस्सा होती थी। जैसे नागपंचमी पर होने वाली कुश्ती और इसी संकल्पना को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए कबड्डी वर्तमान समय में विभिन्न खेलों का आयोजन किया जाता है। प्रत्येक देश में विभिन्न स्तरों की खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है जिसमें जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रतियोगितायें आयोजित होती हैं।

जिस प्रकार ओलम्पिक खेलों में सम्पूर्ण विश्व के देशों के खिलाड़ी प्रतिभाग करते हैं उसी प्रकार एशियायी खेलों में सम्पूर्ण एशिया महाद्वीप के अनेक देशों के खिलाड़ी भाग लेते हैं। एशियायी खेलों का जनक प्रोफेसर गुरुदत्त शौधी को माना जाता है। एशियायी खेलों का नामकरण पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने किया था। एशियायी खेलों का उद्देश्य है- हमेशा आगे की ओर।

प्रथम एशियायी खेलों का आयोजन

मलेशिया, फिलीपीन्स, थाईलैण्ड, नेपाल तथा आदि देशों ने भाग लिया था। एशियायी खेल चार वर्षों के अन्तराल पर आयोजित होते हैं। इन खेलों का नियमन एशियायी ओलम्पिक परिषद द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक परिषद के पर्यवेक्षण में किया जाता है। प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान के लिए स्वर्ण, दूसरे के लिए रजत तथा तीसरे के लिए कांस्य पदक दिये जाते हैं।

एशियायी खेल

एशियायी खेल

एशियाई खेलों का आयोजन एक विशिष्ट लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया जाता है। जिस प्रकार एशिया महाद्वीप विज्ञान, तकनीक, साहित्य, सैन्य क्षेत्र में प्रगति की ओर अग्रसर होकर वैश्विक स्तर पर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है उसी प्रकार एशियार्ड का आयोजन भी विश्व स्तरीय खेल-कूद

जैसे ओलम्पिक आदि में अपना विशिष्ट स्थान बनाने के लिए किया जाता है। एशियाई खेलों में खिलाड़ी खेल भावना से विभिन्न खेलों में सहभाग करते हुए प्रतिस्पर्धा के भाव को जीवन्त रखते हैं प्रत्येक चार वर्ष के में अन्तराल पर विभिन्न एशियाई देशों में बदल-बदल कर जाने का अवसर प्राप्त होता है तथा वहाँ एक दूसरे से परिचित होते हैं।

प्रतिभागी एशियाई देशों की भाषा, वेश-भूषा, खान-पान और रीति-रिवाजों से भी परिचित होते हैं। खिलाड़ी खेल स्पर्धा में एक दूसरे से अनुभव अर्जित करते हैं खिलाड़ी में राष्ट्रीयता की भावना भी विकसित होती है। खेल के माध्यम से वह अपने राष्ट्र गौरव और शान के लिए अपनी जान लगा देता है। कैरियर निर्माण में भी इन खिलाड़ियों के लिए खेल-कूद सहायक होता है। एक गीत की पंक्ति है:

अनेकता में एकता हिन्द की विशेषता।”

इसकी सार्थकता एशियाई खेलों में देखने को मिलती है। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचन्द्र का राष्ट्र प्रेम अनूठा उदाहरण है उन्होंने राष्ट्र के गौरव और स्वाभिमान के लिए जर्मनी के शासक के आग्रह को विनम्रता पूर्वक अमान्य कर दिया था। इसी प्रकार नौकायन प्रतियोगिता में रोमानिया की घटना हम सबके लिए प्रेरणादाई है।