human environment interaction
14/08/2021 By shiv3376 0

मानवीय पर्यावरण human environment

मानवीय पर्यावरण human environment

इस लेख में हम बस्ती, परिवहन और दूरसंचार के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।

  1. अतिप्राचीन काल में मानव बंजारों की भांति घुमंतु दशा में रहा। धीरे-धीरे उसने अपने जीवन को कई आविष्कारों के माध्यम से संगठित किया, जैसे-आग, धातु, चक्र, कृषि आदि। इस प्रकार से उसने सहयोग और भाईचारे के गुण विकसित किए और निरंतर प्रगति करते हुए 20वीं शताब्दी में विज्ञान) और तकनीक की अति विकसित अवस्था में आ गया।

बस्ती(Settlement)

बस्ती का अर्थ है सामूहिक मानवीय निवास क्षेत्र जो एक गाँव, नगर या बड़े शहर के रूप में हो सकता है। समय और परिस्थितियों के साथ एक छोटी बस्ती एक बड़े शहर का रूप ले सकती है। मुख्यतः दो प्रकार की बस्तियाँ होती हैं ग्रामीण और नगरीय

ग्रामीण बस्ती (Rural Settlement)

ग्रामीण बस्ती घरों और सड़कों का संघटित ढाँचा है जिसमें अधिकांशतः खेती करने वाले लोग रहते हैं। इस बस्ती के चारों और जोतने लायक भूमि होती है। ग्रामीण बस्ती में जनसंख्या काफी कम होती है।

नगरीय बस्ती (Urban settlement)

मानवीय पर्यावरण human environment

नगरीय बस्ती घरों, सड़कों, दुकानों आदि का जटिल ढाँचा होता है। इसका स्वरूप ग्रामीण बस्तियों से बिल्कुल भिन्न होता है। नगरीय बस्ती में मुख्यतः ऐसे लोग रहते हैं जो माध्यमिक और क्षेत्रीय व्यवसाय करते हैं; जैसे-उद्योग, व्यापार, परिवहन और सेवा नगरीय बस्तियों की जनसंख्या कुछ हज़ार से लाख और करोड़ तक भिन्न-भिन्न हो सकती है। आधुनिक युग में बस्तियाँ महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर रही हैं क्योंकि यहाँ पर उपयुक्त सुविधाएँ उपलब्ध रहती है।

लोग ग्रामीण बस्ती से नगरीय बस्ती में रोजगार और सुविधाओं के कारण पलायन करते हैं और नगरीय बस्ती पर दबाव सदैव बढ़ता रहता है। इसलिए बड़े नगरों में रहने वाले लोगों का जीवन अक्सर जनसंख्या, उद्योग, परिवहन और अन्य कारणों से विपरीत प्रभावित होता है। यह केवल योजना के अभाव को दर्शाता है।

बस्ती (Settlement)

मानवीय पर्यावरण human environment

इस प्रकार ग्रामीण या नगरीय बस्ती बसे हुए घरों का पुंज है। बस्ती के अध्ययन का मानवीय भूगोल का एक विशेष महत्त्व है। भिन्न देश एक बस्ती को ग्रामीण या नगरीय बस्ती का पदनाम देने में भिन्न मानदण्ड अपनाते हैं। परंतु अधिकांश देशों में जनसंख्या का आकार, आर्थिक गतिविधियों और प्रशासन के प्रकार द्वारा ग्रामीण बस्ती को नगरीय बस्ती से अलग करने का आधार बनाया जाता है।

वस्ती के अन्य प्रकार (Other Forms of Settlement)

1. केंद्रित या पुंज आकृति (Nucleated or Clustered Pattern) इस रूप में घर एक दूसरे के अति निकट होते हैं और सघन प्रकार से बनाए जाते हैं। जल स्रोत, सुरक्षा की आवश्यकता, सामूहिक आराम और लाभ इसकी वृद्धि के मुख्य कारण हैं।

2. बिखरी या फैली बस्ती (Dispersed or Scattered Settlement) फैली बस्ती कम जनसंख्या, घाटियों या पहाड़ियों के नीचे वाले क्षेत्रों में

होती है। यहाँ पर इमारतें एक दूसरे से काफी दूर होती हैं। वे लगभग अकेली होती हैं। वहाँ पर बड़े कृषि पर होते हैं।

3. रेखीय या पट्टी आकृति (Linear or Ribboned Pattern) जब घर या इमारतें सड़क, नहर, नदी या रेलवे लाइन के साथ होते हैं तो ऐसी बस्ती को रेखीय बस्ती कहते हैं।

4. त्रिज्य आकृति (Radial Pattern) इसमें घर या इमारतें एक केंद्रीय स्थान; जैसे जल का स्रोत, मंदिर या चौराहे से बाहर की ओर फैलती हैं।

5. आयतीय आकृति (Rectangular Pattern) यहाँ पर दो या अधिक सड़कें एक दूसरे को काटती हैं और घर एक आयतीय आकृति में होते हैं।

6. योजित बस्ती (Planned Settlement) ये सरकार द्वारा वास्तुकारों की मदद से बनाए जाते हैं। इन नगरों के उदाहरण हैं: केनबरा (आस्ट्रेलिया की राजधानी) और चंडीगढ़ (पंजाब और हरियाणा की राजधानी)।

बस्ती के विकास के कारण (Causes of Development of Settlement)

बस्ती को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Settlement)

1. वातावरण के भिन्न तत्व; जैसे भूमि, मृदा, जल, जीव, पशु, खनिज इत्यादि मानवीय बस्ती को प्रभावित करते हैं।

2. जलवायु के कारक जैसे ताप, वर्षा, वाष्पीकरण आदि भी मानवीय बस्ती को प्रभावित करते हैं। जलवायु का घरों पर प्रभाव घरों के प्रकार और लगाए गए पदार्थों पर निर्भर करता है। एक गर्म रेगिस्तान में घर कीचड़ की दीवारों और समतल छतों से बनाए जाते हैं।

मोटी कीचड़ की दीवारें दिन में घर को ठण्डा रखती हैं क्योंकि कीचड़ ऊष्मा का कुचालक है। भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में घरों की छतें दलयाँ होती हैं जो वर्षा के जल को तुरंत नीचे गिरा देती हैं परंतु एक अच्छे योजित और साफ नगर या कस्बे में इमारतें काँच या अन्य पदार्थों से बनाई जा सकती है। काँच प्रकाश को इमारत में आने देता है और धूल को बाहर रखता है।

पक्का घर (The Pucca House)

सीमेंट और इस्पात की छड़ों के प्रयोग ने घर और बहुमंजिली इमारतें बनाने की कला में क्रांति ला दी है। आग की खोज ने पकाई हुई ईंटों का प्रयोग सिखाया धातु की खोज और धातु के यंत्रों के प्रयोग ने मानव की लकड़ी के चौखट और मजबूत छत बनाने में मदद की।

स्थानीय निर्माण सामग्री आज भी सस्ते घर बनाने में प्रयोग में आते हैं लाल पत्थर एक ऐसा ही पदार्थ है जो छत बनाने के लिए राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में प्रयोग में लाया जाता है। इस पत्थर को चादरों में भी काटा जा सकता है। उत्तरी यूरोप में पुराने क्षेत्रों में बने घरों का मुँह दक्षिण की ओर होता है, जो गर्म रहते हैं। उनकी खिड़कियाँ बड़ी और काँच की बना होती हैं ताकि अधिकतम सूर्य का प्रकाश घर में प्रवेश कर सके।

परिवहन (Transport)

प्रागैतिहासिक बेड़े से लेकर आधुनिक हवा की गति से तेज़ चलने वाले वायुयान का एक लम्बा इतिहास है। सदियों तक कहीं जाने का केवल ही साधन था-चलना या पशुओं की सवारी करना 3500 ई० पूर्व पहिए की खोज और पहियों वाले वाहनों का विकास क्रांति ले आया। भाप के इंजन के विकास के बाद 18वीं शताब्दी में विद्युत और 19वीं शताब्दी के अंत में आंतरिक दहन इंजन भी आ गए।

परिवहन के प्रकार (Types of Transport) भौगोलिक प्रकार से तीन प्रकार के परिवहन वर्तमान समय में उपलब्ध हैं:

1. भूमि 2. जल 3. वायु

1. भूमि परिवहन (Land Transport)

(i) रोडवेज़ (Roadways): कम दूरी के लिए यह मुख्य साधन है। सड़कें खेतों से सुदूर कारखानों और बाज़ारों तक जाती हैं। माल को उपभोक्ता के घर तक ले जाया जा सकता है। सड़क परिवहन के अन्य साधनों की तुलना में अधिक लाभदायक है क्योंकि ये पर्वतीय और सुदूर स्थानों तक बनाई जा सकती हैं। सड़क मार्ग का वितरण संसार में असमान है। विकसित देशों; जैसे अमेरिका, जर्मनी, रूस आदि में सड़क मार्ग का एक योजित संजाल देखने को मिलता है।

(ii) रेलवे (Railways): रेलवे के परिचय के साथ ही परिवहन अत्यंत सरल हो गया। द्रुत परिवहन का साधन रेलवे, सड़क मार्ग की तुलना में अधिक भार ले जा सकता है। भारत का प्रथम रेल मार्ग 1853 में मुंबई से थाणे तक बिछाया गया। वर्तमान में भारत में 108,706 किमी का रेल मार्ग है। सभी मुख्य नगर द्रुत रेलों से जुड़े हैं। रेलवे औद्योगिक क्रांति का उत्पाद है। रेलवे ने एक स्थान से दूसरे स्थान तक परिवहन में योगदान दिया है। परंतु रेलवे उपभोक्ता के दरवाजे तक नहीं जा सकता। विश्व का सबसे लम्बा रेलवे मार्ग ट्रांस साइबेरियन रेलवे है जो रूस में है।

2. जल परिवहन (Water Transport)

यह परिवहन के प्राचीनतम साधनों में से एक है। जल परिवहन को दो समूहों में विभाजित किया जा सकता है:

(i) आंतरिक जलमार्ग (Inland Waterways ) यह परिवहन का सबसे सस्ता माध्यम है और विशेषतः भारी सामान; जैसे कोयला, लौह अयस्क, लकड़ी आदि लाने ले जाने के लिए उपयुक्त है। नदियाँ, नहरें और झीलें आंतरिक जलमार्ग का मुख्य माध्यम हैं। परिवहन के अन्य साधनों की तुलना में आंतरिक जलमार्ग कम प्रदूषण फैलाता है। अमेजन, जायरे, नाइजर, गंगा, रिन्यू डेनूब, फ्ली, मिसीसिपी संसार की मुख्य नदियाँ हैं जो आंतरिक जलमार्ग के लिए प्रयोग की जाती हैं।

(ii) महासागरीय मार्ग (Ocean Routes) महासागर सस्ते और सुगम परिवहन उपलब्ध कराते हैं। संसार का अधिकांश व्यापार महासागरीय मार्ग से ही होता है। संसार के मुख्य महासागरीय मार्ग हैं ::

1. उत्तरी अटलांटिक मार्ग

2. स्वेज नहर मार्ग

3. केप आफ गुड होप मार्ग

4. प्रशान्त महासागरीय मार्ग

5. दक्षिणी अटलांटिक मार्ग

6. पनामा नहर मार्ग

स्वेज नहर (Suez Canal)

इसने यूरोप, पूर्वी अफ्रीका ओर एशिया के लिए छोटा मार्ग खोला है। इसके पूर्व जहाजों को केप आफ गुड होप जाने के लिए अफ्रीका जाना पड़ता था। लंदन और मुंबई के बीच की यह दूरी अब 9600 किमी कम हो गई है। ऐसी नहर के होने से कई उत्पादों की कीमत भी कम हो गई है।

3. वायु परिवहन (Air Transport)

यह परिवहन का सबसे तेज माध्यम है यह हल्के कीमती और खराब होने वाली सामग्री के परिवहन के लिए अधिक उपयुक्त है। यह पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयुक्त है जहाँ सड़कें और रेलवे नहीं पहुंच पाती।

पाइपलाइन (Pipelines)

परिवहन का अत्याधुनिक साधन है पाइपलाइनें। जिनका प्रयोग अधिकांशत; खनिज, तेल, प्राकृतिक गैस और जल के परिवहन में होता है। रूस, ईरान, ईराक, अमेरिका आदि में पाइपलाइनों का सघन संजाल है।

दूरसंचार (Communication)

दूरसंचार का अर्थ है सूचना का आदान प्रदान आधुनिक दूरसंचार के कारण संसार सिकुड़ता होता है यह हमारे संदेश को पलभर में विश्व में कहीं भी भेजने में समर्थ है। यह तकनीक कारण ही है कि हम सूचना; जैसे-वाणी, संगीत, चित्र और पत्र आदि को भेज और प्राप्त कर सकते हैं। इसके उपकरणों में हैं: टेलिफोन, रेडियो, उपग्रह, टेलीविज़न, कम्प्यूटर और इंटरनेट टेलिग्राफ जो आधुनिक दूरसंचार में अग्रणी है।

दूरसंचार के प्रयोग (Uses of Communications)

1. दूरसंचार के साधन; जैसे- रेडियो, टीवी, कम्प्यूटर भी शिक्षा और मनोरंजन के स्रोत हैं। ये हमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मामलों की सूचना देते हैं।

2. दूरसंचार के साधनों ने विश्व व्यापार के विकास में अत्यंत महत्त्वपूर्ण कार्य किया है।

3. दूरसंचार के इन सभी साधनों ने लोगों को राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से एक करके राष्ट्रीय अखण्डता की भावना लाने में

महत्त्वपूर्ण कार्य किया है।

सामूहिक संचार (Mass Communication)

यह एक व्यक्ति को सूचित करने और मनोरंजन करने का साधन है ताकि वह चयन करके निर्णय कर सके जो काफी तथ्यों पर आधारित होता है। औपचारिक रूप से लोग एक के बाद एक के आधार पर संचार करते हैं। यह लोगों को कई स्थानों पर सूचना देने के साधन के रूप में, सामूहिक संचारके रूप में विकसित हुआ।

सामूहिक संचार के साधन (Means of Mass Communication)

रेडियो, टेलीविजन और समाचार पत्र सामूहिक संचार के अत्यंत प्रचलित साधन हैं। इनके माध्यम से एक ही समय पर लाखों लोगों से सम्पर्क किया जा सकता है। रेडियो और टेलीविजन हमारे घरों में समाचार, खेलकूद, मनोरंजन और शिक्षा लाते हैं। हम ये सब सुविधा सामूहिक संचार से पा लेते हैं। वे बिगड़े मौसम की चेतावनी और अन्य संकटों से भी हमें सावधान करते हैं इनके माध्यम से सरकार के नेता, लोगों के सम्पर्क में रहते हैं।

सूचना युग (The information Age)

20वीं शताब्दी के आरम्भ में सूचना की उपलब्ध मात्रा लगभग प्रत्येक 100 वर्षों में दूनी हो रही थी। कम्प्यूटर के अधिकतम प्रयोग के कारण, अब यह प्रत्येक चार वर्षों में दूनी हो रही है। सूचना की दर और अधिक बढ़नी ही है क्योंकि तकनीकी विकास के ई-मेल और इंटरनेट जैसे माध्यमों ने अन्य प्रयोगों और उन्नति के लिए दरवाजे खोल दिए हैं।

उपग्रह संचार तंत्र (Satellite Communication System)

20वीं शताब्दी के द्वितीय उत्तरार्ध में उपग्रह संचार तंत्र संचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। यह तंत्र अत्यंत महत्त्वपूर्ण और प्रसिद्ध हो गया है। मानव निर्मित उपग्रहों ने संसार के सभी देशों को एक दूसरे के निकट कर दिया है। संसार के किसी भी भाग से किसी भी घटना का टीवी पर सीधा प्रसारण सम्भव हो गया है।

19 अप्रैल 1975 को भारत ने अपना प्रथम उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ अंतरिक्ष में भेजा। इसके उपरांत कई उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे गए; जैसे-भास्कर, रोहिणी, एप्पल, इनसैट-1, इनसैट-1A, इनसैट-1B, इनसैट-1C, इनसैट-ID आदि भारत में उपग्रह संचार तंत्र का प्रयोग टीवी कार्यक्रमों, दूरसंचार सुविधाओं और अन्य कारणों से किया जाता है।